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मध्य प्रदेश
MP: जहर के मरीज का पेट साफ करने की जगह मिनरल वाटर चढ़ाने का आरोप, जांच शुरू
nidhi
24 July 2026 9:29 AM IST

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जहर के मरीज का पेट साफ करने के लिए चढ़ाया मिनरल वाटर
Dindori: स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। आरोप है कि एक अस्पताल में जहर खाने वाले मरीज का पेट साफ करने की प्रक्रिया (गैस्ट्रिक लैवेज) के दौरान डॉक्टर ने कथित तौर पर मिनरल वाटर का इस्तेमाल किया। घटना सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आपात स्थिति में भी इलाज के दौरान जरूरी चिकित्सकीय मानकों का पालन नहीं किया गया।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, एक व्यक्ति ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया था, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल लाया गया। जहर के असर को कम करने के लिए डॉक्टरों द्वारा पेट साफ करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
आरोप है कि इसी दौरान मरीज के पेट की सफाई के लिए सामान्य चिकित्सकीय तरल की जगह मिनरल वाटर का उपयोग किया गया। इस घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
मरीज के परिवार का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही बरती गई। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
परिजनों का कहना है कि जहर के मामलों में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और ऐसी स्थिति में किसी भी तरह की लापरवाही मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती है।
प्रशासन ने शुरू की जांच
मामले की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। जांच में यह देखा जा रहा है कि—
मरीज के इलाज में कौन-कौन सी प्रक्रियाएं अपनाई गईं।
अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाएं क्या थीं।
इलाज के दौरान निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं।
संबंधित डॉक्टर और स्टाफ की भूमिका क्या रही।
जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जहर के मरीजों के इलाज में क्या होता है?
जहर खाने के मामलों में मरीज को तुरंत चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है। डॉक्टर मरीज की स्थिति, जहर के प्रकार और समय के आधार पर उपचार तय करते हैं।
ऐसे मामलों में—
मरीज की सांस और रक्तचाप की निगरानी की जाती है।
जरूरी दवाएं दी जाती हैं।
विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उपचार किया जाता है।
कुछ मामलों में पेट साफ करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
यह प्रक्रिया प्रशिक्षित चिकित्सकीय टीम और निर्धारित मानकों के अनुसार की जाती है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण और छोटे शहरों के अस्पतालों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आपात स्थिति में इलाज के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है। अस्पतालों में प्रशिक्षित स्टाफ, जरूरी उपकरण और मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन बेहद जरूरी है।
दोषियों पर कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और मरीज के परिजनों ने मांग की है कि यदि जांच में लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
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